
New GST Slab Revealed LIVE: लो.. GST पर मोदी सरकार का बड़ा तोहफा – आम आदमी की जेब पर सीधा असर!
नई दिल्ली: भारत के कर सुधारों के इतिहास में एक और मील का पत्थर स्थापित करते हुए, मोदी सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) प्रणाली में क्रांतिकारी बदलावों का ऐलान किया है। GST परिषद की 56वीं बैठक में लिए गए इन ऐतिहासिक फैसलों से, न केवल टैक्स प्रणाली और अधिक सरल होगी, बल्कि करोड़ों आम भारतीयों की जेब पर भी सीधा और सकारात्मक असर पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के भाषण में ‘नेक्स्ट-जेन GST सुधारों’ की घोषणा के बाद, यह कदम सरकार की आर्थिक नीतियों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसका लक्ष्य एक सुदृढ़, पारदर्शी और उपभोक्ता-हितैषी अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है।
GST का नया अवतार: अब केवल दो मुख्य स्लैब (5% और 18%)
GST परिषद ने एक दूरगामी निर्णय लेते हुए, देश की चार-टियर GST संरचना को प्रभावी रूप से दो-टियर प्रणाली में बदल दिया है। पहले के 12% और 28% के स्लैब को समाप्त कर दिया गया है। अब अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं पर मुख्य रूप से 5% और 18% की दर से कर लगेगा। इसके अतिरिक्त, कुछ विशेष श्रेणियों के लिए एक 0% (शून्य प्रतिशत) स्लैब, जिसमें आवश्यक वस्तुएं और सेवाएं शामिल होंगी, और एक 40% का उच्च स्लैब, विशेष रूप से ‘सिन गुड्स’ (जैसे तंबाकू उत्पाद, पान मसाला) और कुछ अत्यधिक लक्जरी वस्तुओं के लिए आरक्षित होगा। ये नए नियम 22 सितंबर से पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगे।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस घोषणा के बाद कहा, “यह कदम GST की शुरुआत के बाद से सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में से एक है। हमारा लक्ष्य कर प्रणाली को अत्यधिक सरल बनाना, अनुपालन लागत को कम करना और अंततः उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाना है।” उन्होंने जोर दिया कि यह बदलाव GST के मूल सिद्धांतों – ‘एक राष्ट्र, एक कर’ – को और मजबूत करेगा।
क्या-क्या हुआ सस्ता? जानें पूरी लिस्ट और आम आदमी पर प्रभाव
सरकार के इस फैसले से आम आदमी के दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली कई वस्तुएं सीधे तौर पर सस्ती हो जाएंगी। यह न केवल उनकी मासिक बजट को राहत देगा, बल्कि खरीद शक्ति को भी बढ़ाएगा, जिससे बाजार में मांग बढ़ेगी।
5% के स्लैब में आने वाली चीजें (पहले 12% या 18%):
- खाद्य पदार्थ: घी, नमकीन, भुजिया, फ्रोजन खाद्य पदार्थ (मीट और समुद्री भोजन को छोड़कर), सॉस, पास्ता, इंस्टेंट नूडल्स, चॉकलेट, कॉफी, चाय और पैकेज्ड मसालों जैसे कई लोकप्रिय खाद्य उत्पाद अब 12% और 18% के बजाय 5% GST के दायरे में होंगे। यह परिवारों के मासिक किराने के बिल में उल्लेखनीय कमी लाएगा।
- डेयरी उत्पाद: पनीर और दही जैसे पैकेज्ड डेयरी उत्पादों पर GST की दर 5% से घटाकर शून्य कर दी गई है। वहीं, स्थानीय भारतीय ब्रेड (जैसे रोटी, पराठा, नान) पर भी अब कोई GST नहीं लगेगा, जो पहले 5% के दायरे में था। यह कदम डेयरी किसानों और छोटे बेकरी व्यवसायों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाएगा।
- व्यक्तिगत देखभाल और घरेलू सामान: हेयर ऑयल, शैंपू, टूथपेस्ट, टूथब्रश, साबुन, डिटर्जेंट और सौंदर्य प्रसाधन जैसे दैनिक उपयोग के कई उत्पाद, जो पहले 18% के स्लैब में थे, अब 5% के दायरे में आ गए हैं।
- बच्चों के उत्पाद: बच्चों के लिए खिलौने, बेबी केयर उत्पाद और स्टेशनरी (पेंसिल, पेन, नोटबुक) जैसी वस्तुएं भी 18% से 5% के स्लैब में स्थानांतरित कर दी गई हैं, जिससे बच्चों की परवरिश का खर्च कम होगा।
- स्वास्थ्य और शिक्षा: कई जीवन रक्षक दवाओं पर लगने वाला GST 12% से घटाकर शून्य कर दिया गया है। शिक्षा से संबंधित कुछ सेवाओं और सामग्रियों पर भी GST की दर कम की गई है।
- अन्य: साइकिल, छाते, माचिस और अगरबत्ती जैसी कई अन्य छोटी-मोटी वस्तुएं भी अब 5% के स्लैब में होंगी।
18% के स्लैब में आने वाली चीजें (पहले 28%):
- इलेक्ट्रॉनिक सामान: पहले 28% के सबसे ऊंचे स्लैब में आने वाले एयर कंडीशनर, डिशवॉशर, रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन, और 32 इंच से ऊपर के टेलीविजन अब 18% के स्लैब में आ गए हैं। इससे इन सफेद वस्तुओं (white goods) की कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी, जिससे घरों को आधुनिक उपकरणों से लैस करना और अधिक किफायती हो जाएगा।
- ऑटोमोबाइल: छोटी कारें (4 मीटर से कम), हैचबैक और 350 सीसी तक की मोटरसाइकिलें, जिन पर पहले 28% GST लगता था, अब 18% के स्लैब में आ गई हैं। यह मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए कार और बाइक खरीदना और भी आसान बना देगा, जिससे ऑटोमोबाइल सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा।
- परिवहन सेवाएं: बसों, ट्रकों और एम्बुलेंस जैसी सार्वजनिक और वाणिज्यिक परिवहन सेवाओं पर GST की दर भी 28% से घटाकर 18% कर दी गई है। इससे माल ढुलाई और यात्री किराए में कमी आने की उम्मीद है।
- सीमेंट और पेंट: निर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण सीमेंट और पेंट जैसी वस्तुएं भी 28% से 18% के स्लैब में आ गई हैं, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
नए GST स्लैब का सारांश
| पुरानी GST दर | नई GST दर | मुख्य वस्तुएं/सेवाएं प्रभावित |
| 0% | 0% | आवश्यक खाद्य वस्तुएं (अनाज, कच्चा दूध, ताजा सब्जियां), आवश्यक सेवाएं, डेयरी उत्पाद (पनीर, दही) |
| 5% | 5% | पैकेज्ड खाद्य पदार्थ, चीनी, चाय, कॉफी (कुछ प्रकार), मसाले, कुछ दवाएं |
| 12% | 5% या 18% | पहले 12% में आने वाले कई खाद्य उत्पाद 5% में, इलेक्ट्रॉनिक्स के कुछ हिस्से 18% में |
| 18% | 5% या 18% | दैनिक उपयोग की वस्तुएं (शैंपू, साबुन) 5% में, अधिकांश सेवाएं, अधिकांश टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएं 18% में |
| 28% | 18% या 40% | इलेक्ट्रॉनिक्स (AC, TV), ऑटोमोबाइल (छोटी कारें) 18% में, सिन गुड्स 40% में |
| – | 40% | ‘सिन गुड्स’ और लग्जरी आइटम (तंबाकू, पान मसाला, लग्जरी कारें) |
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सरकार का उद्देश्य: सरलता, पारदर्शिता और आर्थिक विकास
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जोर देकर कहा कि इस बड़े बदलाव का मुख्य उद्देश्य GST प्रणाली को और अधिक सरल बनाना है। दरों में यह कमी न केवल आम नागरिक के लिए जीवन को सस्ता बनाएगी, बल्कि छोटे और मध्यम व्यवसायों (MSMEs) के लिए अनुपालन का बोझ भी कम करेगी, जिससे वे अपने व्यवसाय पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकें।
सरकार का मानना है कि टैक्स दरों में कमी से बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढ़ेगी, जिससे उत्पादन में वृद्धि होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। अंततः, बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधि और बेहतर अनुपालन के माध्यम से, सरकार को राजस्व संग्रह में भी दीर्घकालिक वृद्धि की उम्मीद है। यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था में एक नई जान फूंक सकता है, विशेषकर आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए, जहां उपभोक्ता खर्च बढ़ने की प्रबल संभावना है।
विश्लेषकों की राय और आगे की राह
आर्थिक विश्लेषकों ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि यह भारत को एक अधिक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनाएगा। ICICI बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री ने कहा, “यह एक साहसिक और आवश्यक कदम है। दरों का युक्तिकरण अनुपालन को बढ़ावा देगा और काले धन के प्रवाह को कम करने में मदद करेगा। यह भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक जीत है।”
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने 40% के उच्च स्लैब की आवश्यकता पर सवाल उठाए हैं, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह केवल कुछ बहुत ही विशिष्ट वस्तुओं के लिए है, जिनका उपभोग समाज के लिए हानिकारक माना जाता है या जो अत्यधिक लक्जरी की श्रेणी में आती हैं।
GST दरों में यह बदलाव सिर्फ एक तकनीकी समायोजन नहीं है, बल्कि यह मोदी सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की नीति का प्रतिबिंब है। यह एक ऐसा ऐतिहासिक कदम है जो भारतीय अर्थव्यवस्था में एक नई जान फूंक सकता है और आम जनता के लिए एक बड़ा ‘दिवाली गिफ्ट’ साबित हो सकता है। यह दिखाता है कि सरकार केवल आर्थिक विकास पर ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के कल्याण और जीवन को आसान बनाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।